एक तालाब किनारे
एक बगुला अपने बच्चे को समझा रहा था
कि मछली कैसे पकड़ते हैं
छोटा बगुला बार बार ग़लतियाँ करता
कभी अपनी चोंच दायें मारता
कभी बायें
लेकिन मछली पकड़ में ना आती
बड़े बगुले ने उसे सौ दफे करके दिखाया
छोटे बगुले को तब भी समझ में ना आया
बस हर बार कहता, “एक बार और” करके बताओ ना
खेल चलता रहा
बड़ा ‘एक बार और’ करता रहा, छोटा ‘एक बार और’ देखता रहा
और धीरे धीरे छोटा बगुला सब सीख गया
समय निकला
छोटा हुआ बड़ा और बड़ा हो गया बूढा
छोटा हुआ बड़ा और बड़ा हो गया बूढा
एक दिन छोटा बगुला घर में कोई नया दाना लेकर आया
और बोला ये नयी चीज़ है खाकर देखो
बड़े को समझ नहीं आया कि कैसे खाए
बोला बेटा एक बार ज़रा खा कर तो दिखा कैसे खाते हैं
जल्दी में तो था ही, छोटे ने झट से खाकर बता दिया
बड़े ने बोला बेटा “एक बार और” बताओ बूढ़ी आँखों को ज़रा दिखाई नही पड़ा
“एक बार में कोई चीज़ समझ आती है तुम्हे?”
ऐसा कह छोटा बगुला बाहर उड़ गया ..


2 comments:
nice. this is so much like papaji ki "baal hat, vriddh hat" !! :-)
Sahi jawaab. That and also ek kahaani sunaate thhey wo "oont" waali agar yaad ho to. :-)
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